Passage Indexing क्या है, एवं इसके लाभ

पैसेज इंडेक्सिंग क्या है, कैसे करें, (What is Passage Indexing, Kaise Kare, Google, SEO in Hindi)

दोस्तों गूगल अपने सर्च इंजन में आये दिन बदलाव करता रहता है. आये दिन नई एल्गोरिथ्म का उपयोग करता है जिसका उद्देश्य अपने यूजर्स को बेहतर से बेहतर रिजल्ट देना होता है. इस बार गूगल ने पैसेज इंडेक्सिंग की शुरुआत की है. आज हम आपको अपने इस आर्टिकल में बताएंगे कि क्या है पैसेज इंडेक्सिंग और क्यों पड़ी इसकी जरुरत और किस तरह से यह परफॉर्म करेगी .

passage indexing kya hai in hindi

क्या हैं पैसेज इंडेक्सिंग (Passage Indexing)

पहले जब भी हम गूगल पर कोई क्वेरी डालकर उसका आंसर पढ़ना चाहते थे तो हमें गूगल सबसे ज्यादा अनुकूल जवाब आगे के 10 पोस्ट में दिखाता था, क्योंकि गूगल हर हाल में अपने यूजर को कम परेशानी देते हुए उचित से उचित आंसर देना चाहता है इसीलिए वह आए दिन अपने एल्गोरिथ्म में बदलाव करता रहता है.

और गूगल बहुत ही अच्छी तरह से जानता है कि अगर उसके यूजर को कम समय में सबसे सही जवाब मिलेगा तो उसका यूजर काफी खुश होगा . इसके लिए गूगल नए नए तरह के एल्गोरिथ्म का इस्तेमाल करता है. इस बार गूगल में पैसेज इंडेक्सिंग का फार्मूला अपनाया है जिसको हम एक उदाहरण के जरिए आपको समझाएंगे.

दी गई इमेज पर ध्यान से देखिए यह एक स्क्रीनशॉट है जिसमें मैंने एक क्वेरी डाली है जो कि हैं “सपनों का मतलब”,  इसके लिए गूगल ने नीचे सबसे उत्तम 10 रिजल्ट आपके सामने रखे हैं

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 परंतु जो सबसे पहला रिजल्ट है वह एक बॉक्स के अंदर गूगल शो कर रहा है . हम जैसे ही उस बॉक्स में दी गई लिंक पर क्लिक करते हैं तो हमें दूसरी इमेज पर जिस तरह से डाटा दिखाई दे रहा है वैसा देखने मिलता है जैसा कि आप देख रहे हैं कि दूसरी इमेज पर यलो लाइन में पूछी गई क्वेरी का आंसर दिया गया है तो दोस्तों यही है पैसेज इंडेक्सिंग.

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इसके जरिए गूगल अपने यूजर को उसके द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब हाईलाइट करके दिखा रहा है जिसके लिए गूगल सर्च रिजल्ट में आने वाली वेबसाइट के सभी पैसेजेस की इंडेक्सिंग कर रहा है और इस इंडेक्सिंग के जरिए वह अपने यूजर को बेहतर से बेहतर आंसर सबसे पहली पोजीशन पर देने की कोशिश कर रहा है.

गूगल क्यों कर रहा है पैसेज इंडेक्सिंग

अपने यूजर को उसके द्वारा पूछे जाने वाले सवाल का कम से कम शब्दों में सही जवाब देने के लिए गूगल पैसेज इंडेक्सिंग का इस्तेमाल कर रहा है. दोस्तों हम सभी को पता है कि आजकल वॉइस सर्च बहुत ज्यादा बढ़ गई है जैसे ही कोई यूजर वॉइस सर्च करता है उसे बहुत ही जल्दी उसके रिजल्ट मिलते हैं. अब गूगल यह भी चाहता है कि वॉइस सर्च में मिलने वाले रिजल्ट मशीन द्वारा ही यूजर को पढ़कर सुना दिये जाए जैसे कि हम कई तरह के एप्लीकेशन अपने मोबाइल फोन में देखते हैं जिसके जरिए हम अगर सवाल करते हैं तो मोबाइल फोन हमें खुद ही आंसर दे देता है लेकिन कोई मोबाइल फोन कैसे आपको आंसर देगा? यह आंसर आपको गूगल के सर्च इंजन से ही मिलेगा और इस सर्च इंजन पर काम करने वाली वेबसाइट ही आपके लिए वह जवाब लिखेगी लेकिन वह जब आप एक बड़े से आर्टिकल के फॉर्म में अगर आपके सामने रख दिए जाएंगे तो आपको उसमें सटीक आंसर को ढूंढने में काफी परेशानी होगी. इसके लिए गूगल ने पैसेज इंडेक्सिंग की मदद ली है जिसके जरिए पूछे जाने वाले सवाल को गूगल या तो हाईलाइट करके आपके सामने रखेगा या अगर कोई मशीन इस जवाब को पढ़कर सुना रही है तो वह आसानी से सटीक शब्दों में पूछे जाने वाले सवाल का जवाब दे सकेगी .

कैसे की जा रही हैं पैसेज इंडेक्सिंग

अब हम यह जानना चाहते हैं कि गूगल कैसे पैसेज इंडेक्सिंग कर रहा है? गूगल पैसेज इंडेक्सिंग के लिए किसी भी आर्टिकल में मौजूद सभी पैसेजेस को अलग-अलग तरीके से इंडेक्सिंग कर रहा है जैसे गूगल पहले किसी आर्टिकल के टाइटल को देखकर समझ कर यूजर को एक स्पेसिफिक आंसर देता था. उसी तरह गूगल अब एक आर्टिकल में से सभी पैराग्राफ को पूरी तरह से समझ कर उस में से सबसे सही आंसर को निकाल कर अपने यूजर को दे रहा है जिसके लिए यूजर अलग-अलग पैराग्राफ की इंडेक्सिंग कर रहा है लेकिन फिलहाल इस तरह के इंडेक्सिंग करने के कारण गूगल को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिस परेशानी को हल करने के लिए गूगल ने कैनॉनिकल टैग का इस्तेमाल किया है जिसके बारे में आप जानकारी दी गई लिंक से पढ़ सकते हैं.

पैसेज इंडेक्सिंग के कारण गूगल किसी आर्टिकल में मौजूद सभी पैराग्राफ की इंडेक्सिंग करता है जिसके लिए वह हर एक क्वेरी के आंसर को हाईलाइट करके दिखाने के कारण एक नए तरह के यूआरएल को जनरेट कर देता है जो कि आप दी गई इमेज में देख सकते हैं. इस कारण गूगल खुद ही किसी एक पर्टिकुलर आर्टिकल के लिए कई तरह के यूआरएल जनरेट कर रहा है जिस कारण गूगल को कई तरह की परेशानी का सामना भी करना पड़ा जिस परेशानी को हल करने के लिए गूगल ने कैनॉनिकल टैग का इस्तेमाल किया जिसके जरिए गूगल ने यह स्पष्ट तौर पर बताया कि मेन यूआरएल कौन सा है और पैसेज इंडेक्सिंग के कारण बनने वाले यूआरएल अलग है. और उस आर्टिकल पर मिलने वाले सारे बेनिफिट उस मेन यूआरएल को मिलना जरूरी है.

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इस तरह से गूगल आने वाले समय की मांगों को पूरा करने के लिए पैसेज इंडक्टिंग का इस्तेमाल करते हुए अपने यूजर्स को बेहतर से बेहतर रिजल्ट देने की कोशिश कर रहा है.

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